कम्पाइलर क्या होता है ? – Compiler meaning in hindi

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अगर आपके मन में भी ये सवाल है की Compiler क्या होता है ? और कम्पाइलर का मतलब क्या है ? तो आज इस पोस्ट में आपको सभी सवाल का जवाब मिल जायेगा |

कम्पाइलर शब्द कंप्यूटर प्रोग्राम से जुड़ा हुआ है , तो अगर आप कहीं भी कम्पाइलर शब्द के बारे में सुनते हैं या आपसे पुछा जाता है तो आपको समझ जाना चाहिए की आपसे कंप्यूटर से रिलेटेड कोई सवाल किया जा रहा है |

तो चलिए सबसे पहले हम जानते हैं compiler meaning in hindi ? क्यूंकि अगर हमे इसका hindi मतलब पता होगा तो इसे बारे में हम और भी अच्छे से समझ पाएंगे |

Compiler Meaning in hindi

कम्पाइलर को हम हिंदी में “संकलक या संकलनकर्ता ” बोलते हैं | अगर आप नही जानते हैं तो हम आपको बता दें की संकलन का मतलब होता है एकत्र करना | जब भी हम कई सारी चीजों को मिलाकर कुछ बनाते हैं तो उसे हम कंपाइलेशन बोलते हैं |

कम्पाइलर एक प्रकार प्रोग्राम है जो की किसी भी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को मशीन लैंग्वेज में बदलता है ताकि कंप्यूटर उसे समझ पाए |

अगर आपको कंप्यूटर की टेक्निकल नॉलेज होगी तो आप जानते होंगे की कंप्यूटर में हम high लेवल लैंग्वेज का इस्तेमाल करते हैं और कंप्यूटर सिर्फ मशीन लैंग्वेज को समझता है तो इसी लिए कम्पाइलर लैंग्वेज को कन्वर्ट कर देता है ताकि कंप्यूटर हमारे इंस्ट्रक्शन को समझ जाये |

तो चलिए अब हम कम्पाइलर के बारे में आपको पूरी जानकारी देते हैं की compiler kya hota hai ? और कम्पाइलर का मतलब क्या है ? |

हमने आपको ये तो बता दिया की कम्पाइलर काम क्या करता है लेकिन हमे अभी ये पता है की कम्पाइलर काम कैसे करता है ? तो इसके बारे में भी हम इस पोस्ट में आपको बताने वाले हैं |

कम्पाइलर क्या होता है ?

कम्पाइलर एक सॉफ्टवेर प्रोग्राम है जो की हमारे द्वारा लिखे गये command या फिर high level language को binary code में बदलता है क्यूंकि कंप्यूटर प्रोसेसर सिर्फ बाइनरी कोड (0,1) को ही समझता है |

कम्पाइलर जब भी किसी भी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज यानि की high लेवल लैंग्वेज को बाइनरी कोड में बदलता है तो हम उस प्रोसेस को कंपाइलेशन बोलते हैं |

कम्पाइलर किसे कहते हैं ?

अब हम आपको कम्पाइलर के बारे में समझायेंगे वो भी बिल्कुल आसान भाषा में क्यूंकि अगर आप एक नॉन टेक्निकल व्यक्ति हैं या फिर आपको कंप्यूटर के बारे में ज्यादा नही पता है तो हमने कंपाइलेशन के बारे में अभी तक जितनी भी जानकरी दी है उसे समझने में आपको काफी परेशानी हो सकती है |

इसीलिए हम एक आसान example की मदद से आपको कम्पाइलर के बारे में बतायेंगे |

आपने कई बार देखा होगा की जब भी कोई व्यक्ति अपने देश से किसी दुसरे देश में जाता है जहाँ पे कोई अलग भाषा बोली जाती है तो उसे एक ट्रांसलेटर की मदद लेनी पड़ती है | ट्रांसलेटर वो व्यक्ति होता है जिससे दोनों देशों की भाषा बोलने और समझने आती है |

तो जब भी हमे उस देश में किसी व्यक्ति से बात करनी होगी तो हम अपनी भाषा में ट्रांसलेटर को बात बतायेंगे और फिर ट्रांसलेटर उसे दूसरी देश की भाषा में बदल कर उस व्यक्ति को बतायेगा और तभी वो हमारी बातों को समझ पायेगा |

इसी प्रकार से कम्पाइलर भी एक high level लैंग्वेज को बाइनरी कोड में बदलता है |

हमने आपको कई बार ये बता दिया की कंप्यूटर बाइनरी कोड यानि की बाइनरी लैंग्वेज को सिर्फ समझता है लेकिन अगर आपको बाइनरी कोड के बारे में नही पता होगा तो इसे समझना आपके लिए थोडा कठिन होगा तो इसीलिए अब हम आपको बाइनरी लैंग्वेज और high लेवल लैंग्वेज के बारे में बताने जा रहे हैं |

बाइनरी कोड क्या होता है ?

binary code सिर्फ दो अंक का कोड होता है – ‘0’ और ‘1’ बाइनरी कोड होता है | बाइनरी कोड में 0 का मतलब होता है “off” तो जब भी बाइनरी कोड 0 होगा इसका मतलब है की switch off है और कोई भी instruction नही मिलेगा |

जब भी बाइनरी कोड 1 होगा तो इसका मतलब है switch on और इस कंडीशन में आपके कंप्यूटर को instruction दिया जायेगा जिसे कंप्यूटर परफॉर्म करेगा |

बाइनरी नंबर सिस्टम एक प्रकार का नंबर सिस्टम है जिसे हम base 2 के साथ लिखते हैं और इसमें सिर्फ दो डिजिट होते है ( 0 , 1 )

तो उम्मीद है की बाइनरी कोड के बारे में समझ में आ गया होगा और अब हम आपको high level language के बारे बतायेंगे और अगर आपको बाइनरी कोड नही समझ आया हो या आपका कोई भी सवाल है तो आप कमेंट करके पूछ सकते हैं |

High level language क्या होता है ?

High level language कई प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का समूह है जिसका इस्तेमाल हम वेब डेवलपमेंट और एप्लीकेशन डेवलपमेंट में करते हैं | High level language को समझना काफी आसान होता है और इसे प्रोग्राम डेवलपमेंट के लिए इस्तेमाल करते हैं |

जब भी हमे कोई वेबसाइट बनानी होती है या कोई एप्लीकेशन बनाना होता है तो हम उसमे कई अलग -अलग प्रोग्रामिंग भाषा का इस्तेमाल करते हैं जैसे – C langugae, C++ , Java, Python etc.

अब हम आपको कम्पाइलर के पार्ट्स के बारे में बतायेंगे ताकि आप कम्पाइलर के बारे में और अधिक जानकारी मिले | तो चलिए अब जानते हैं कम्पाइलर के कुछ major parts के बारे में |

Parts of Compiler | कम्पाइलर के भाग –

कम्पाइलर से दो major parts होते हैं जिसे हमे समझने की आवश्कता है |

1. Analysis Phase – एनालिसिस phase में एक source प्रोग्राम की मदद लेकर इसमें इंटरमीडिएट रिप्रजेंटेशन (intermediate representation) को क्रिएट करते हैं और इस phase के major parts हैं – Lexical Analyzer, Syntax Analyzer और Semantic Analyze.

2. Synthesis Phase – इस synthesis phase में हम intermediate representation की मदद से equivalent target program को बनाते हैं और इस phase के major parts हैं – Intermediate Code Generator, Code Generator, और Code Optimizer.

हमने आपको 2 major कम्पाइलर के parts के बारे में बता दिया और अगर आपको इनमे कोई भी प्रॉब्लम है तो आप कमेंट करके हमसे पूछ सकते हैं |

तो चलिए अब जानते हैं की कम्पाइलर का इस्तेमाल हम क्यूँ करते हैं ? और कम्पाइलर कौन से काम करने में हमारी मदद कर सकते है |

कम्पाइलर का उपयोग क्यों करते हैं ?

कम्पाइलर का इस्तेमाल हम कई अलग -अलग कार्यों के लिए करते हैं |

1. Scanning – Scanning की मदद से हम अपने प्रोग्रामिंग कोड या source कोड में characters को ट्रैक करते हैं , की कौन सा करैक्टर (characters) किस लाइन में मौजूद है | scanning के टास्क में स्कैनर read करता है कोड को और सभी characters का रिकॉर्ड रखता है की कौन सा characters किस line के कोड मौजूद है |

2. Lexical Analysis – Lexical Analysis कम्पाइलर का पहला phase होता है और इसे हम स्कैनर के नाम से भी जानते हैं | यह high लेवल लैंग्वेज इनपुट यानि की characters के sequence को एक sequence of tokens में बदलता है | Lexical Analysis का मुख्य काम यही होता है की उसे टोकन generate करना होता है |

3. Syntactic Analysis -Syntactic analysis को हम syntax analysis भी कह सकते हैं | इसमें हम अपने syntax या sentences के logical meaning को समझने की कोशिश करते हैं | यह NLP का third phase होता है

4. Semantic Analysis – इस phase का काम होता है sentence की meaning को draw करना और syntax में grammer की गलती खोजना | यह कंप्यूटर की मदद करता है किसी भी sentences का भाव समझने में , जो की उस sentences , paragraph में इस्तेमाल किये गये grammatical स्ट्रक्चर की मदद से पता चलता है |

इन सभी प्रोसेस के बाद कम्पाइलर में और भी कई फंक्शन होते हैं जिसके बाद फाइनल हमारा कोड कम्पाइल होता है और उसे हम save कर सकते हैं |

ये हैं कम्पाइलर के कुछ phases जिनकी मदद से कंपाइलेशन की प्रोसेस हो पाती है |

  • Lexical Analysis
  • Synatx Analysis
  • Semantic Analysis
  • Intermediate Code Generator
  • Code optimizer
  • Code generation

उम्मीद है की आप सभी को कम्पाइलर के बारे में समझ में आ गया होगा और कम्पाइलर से सम्बन्धित कुछ सवालों का जवाब भी हमने आपको निचे दिया है जिसे अधिक जानकारी के लिए आप पढ़ सकते हैं | आप निचे दिए विडियो को भी जरुर देखे ताकि आपको पता चल पाए की कम्पाइलर काम कैसे करता है |

निष्कर्ष-

आज के इस पोस्ट में हमने आपको कम्पाइलर के बारे में ज्नाकरी दी है | कम्पाइलर क्या होता है ? , compiler meaning in hindi और आपके सभी कम्पाइलर से सम्बन्धित सवालों का जवाब दिया है | अगर आपको कोई भी सवाल हो तो आप पोस्ट पे कमेंट करके पूछ सकते हैं |

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